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Resort Politics. ओडिशा के बाद हरियाणा में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की नौबत, कड़ी सुरक्षा में कांग्रेस विधायक

CONGRESS MLA

Resort Politics. कांग्रेस की Rajya Sabha Elections को लेकर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स जारी है। पहले Congress ने Odisha के 14 विधायकों को Bhubaneswar से Bengaluru भेजा। यहां उन्हें रामनगर के Bidadi Resort में रखा गया है। Karnataka के Deputy Chief Minister D.K. Shivakumar उनकी खातिरदारी कर रहे हैं। उसी तरह कांग्रेस ने Haryana के 37 में से 31 विधायकों को Chandigarh से Shimla के पास Kufri के The Twin Towers में ठहराया है और इनकी मेजबानी Chief Minister Sukhvinder Singh Sukhu कर रहे हैं। रिसॉर्ट के बाहर Himachal Police तैनात है और किसी को बाहर जाने की जरूरत नहीं है। इस रिसोर्ट में कांग्रेस ने 33 कमरे बुक कराए हुए हैं।

हुड्डा के घर हुई थी बैठक

हिमाचल जाने से पहले कांग्रेस के विधायकों की चंडीगढ़ में भूपिन्दर सिंह हुड्डा के घर पर बैठक हुई थी जिसमें सभी 37 विधायक मौजूद थे। हरियाणा विधानसभा में 90 विधायक हैं जिसमें बीजेपी के पास 48 हैं मगर बीजेपी को इनलो के दो विधायकों के अलावा तीन निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन देने का फैसला किया है। इसका मतलब बीजेपी के पास 53 विधायकों का समर्थन हासिल है।एक सीट जीतने के लिए 31 वोट चाहिए। भाजपा को अपने उम्मीदवार संजय भाटिया को जितवाने के बाद 22 वोट बच रहे हैं। वहीं कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और वह भी अपने उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को आसानी से जितवा लेगी और उसके भी 6 वोट बच जाएंगे।

सतीष नांदल ने बिगाड़ा चुनावी गणित

इस बीच बीजेपी सर्मथित निर्दलीय सतीष नांदल ने पर्चा भर के राज्यसभा चुनाव का गणित बिगाड़ दिया है। नांदल को जीतने के लिए 9 वोट चाहिए और वो कांग्रेस के क्रॉस वोट के बिना संभव नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को हिमाचल शिफ्ट कर दिया है। बाकी के जो 6 विधायक नहीं गए हैं उनमें नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जुलाना से विधायक विनेश फोगाट, बादली से कुलदीप वत्स, पुन्हाना से मोहम्मद इलियास, टोहाना से परमवीर सिंह और पंचकूला से चंद्रमोहन बिश्नोई हैं। इनके हिमाचल नहीं जाने के कारण अपने-अपने व्यक्तिगत कारण हैं।

हरियाणा में क्रॉस वोटिंग का इतिहास

हरियाणा में क्रॉस वोटिंग का इतिहास रहा है और पिछले दो बार कांग्रेस के उम्मीदवारों को ही हार का सामना करना पड़ा है। साल 2016 में हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें तीन प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे थे। बीजेपी की तरफ से चौधरी बीरेंद्र सिंह तो कांग्रेस-इनेलो ने सुप्रीम कोर्ट के वकील आरके आनंद को उम्मीदवार थे। सुभाष चंद्रा निर्दलीय तौर पर राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदावर थे, जो बीजेपी समर्थित थे। बीजेपी के 47 विधायक थे, जबकि कांग्रेस के 17 और इनेलो-अकाली दल के पास 20 विधायक थे। इस लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट विपक्ष को मिलनी थी मगर जब वोटिंग हुई तो सारा खेल पलट गया। कांग्रेस विधायकों ने वो किया जिसका कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता। कांग्रेस के 17 में से 14 विधायकों ने वोटिंग के दौरान गलत पेन का इस्तेमाल किया जिसके चलते उनके वोटों को अमान्य करार दे दिया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि दूसरी सीट पर बीजेपी समर्थित सुभाष चंद्रा जीत गए। बहुमत होते हुए भी आरके आनंद चुनाव हारे।

दूसरी घटना दो साल पहले की है। साल 2022 में भी राज्यसभा की 2 सीटों पर चुनाव हुआ। संख्या के हिसाब से बीजेपी और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलनी थी,  लेकिन फिर खेला हुआ। बीजेपी के तरफ से कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस के तरफ से अजय माकन उम्मीदवार थे। पूर्व केंद्रीय और हरियाणा की कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके विनोद शर्मा ने अपने बेटे कार्तिकेय शर्मा को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाया। इन्हें बीजेपी का समर्थन था।

राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपने वोट बीजेपी एजेंट को दिखाए। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन वोटों को रद्द करने की मांग की मगर वोट रद्द नहीं हुए। नतीजा निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा जीत गए और कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग खुलकर सामने आई। किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग करके अजय माकन के बजाय कार्तिकेय शर्मा को वोट दिया और अजय माकन हार गए। बाद में बीजेपी ने किरण चौधरी को राज्यसभा भेजा। यही वजह है कि कांग्रेस इस बार फूंक फूंक कर कदम रख रही है,उनकी हालत दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीने वाले जैसी है। जो भी विधायक कुफरी के रिसोर्ट में रखे गए हैं ,उन्हें वोटिंग के दिन यानि 16 मार्च सोमवार को ही चंडीगढ़ लाया जाएगा।

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