Haryana News : हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में पहली बार अकेले अपने दम पर लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी ने अभी से 2029 के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। करीब चार साल पहले शुरू की गई इन तैयारियों में भाजपा की नजर 2024 के विधानसभा चुनाव में हारी प्रदेश की 42 सीटों पर है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की गढ़ी सांपला किलोई विधानसभा सीट भी शामिल है।
मंत्री और विधायकों की होगी जिम्मेदारी

भाजपा का लक्ष्य अपने वोट बैंक को बढ़ाना है ताकि अगले विधानसभा चुनाव में अपने ही दम पर सत्ता हासिल करे। इसके लिए पार्टी ने उन सीटों पर फोकस शुरू कर दिया है जहां पार्टी को हार मिली थी। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को 42 विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। अब पार्टी इन 42 सीटों पर पहले अपना संगठन मजबूत करेगी। नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा और संगठन के कामों में गति दी जाएगी। इन सीटों पर संगठन के कामकाज और हलके के विकास कार्यों की निगरानी की जाएगी। संगठन की ओर से जो भी विकास कार्य करवाने होंगे उसकी जिम्मेदारी भाजपा विधायकों व मंत्रियों की होगी।
विपक्ष के इलाके की भी जिम्मेदारी
हरियाणा की सत्तारूढ़ बीजेपी अभी से मिशन-2029 यानी अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। इसी के तहत पार्टी के 42 मंत्रियों व विधायकों की जिम्मेदारी डबल की गई है। खुद के निर्वाचन क्षेत्रों के अलावा मंत्रियों-विधायकों को एक-एक और हलके का जिम्मा दिया है। विपक्ष वाले 42 हलकों के प्रभारी बनाए गए मंत्री-विधायक अब इन हलकों में भी सरकार के विधायक के तौर पर ही काम करेंगे।
कार्यकर्ताओं और जनता के साथ करनी होगी मीटिंग
चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में ही सभी मंत्रियों व विधायकों को उन्हें अलॉट किए गए हलके भके बारे में भी बता दिया गया। अब पार्टी द्वारा इन हलकों में किए जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। विधायकों को अलॉट किए गए हलकों में महीने में कम से कम एक बार जाकर वर्करों व आम लोगों के साथ मीटिंग करनी होगी। इन हलकों से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने वाले नेताओं के साथ भी मंत्रियों-विधायकों का नियमित संपर्क रहेगा। अलॉट किए गए हलकों में बैठकों के जरिये विधायक यह भी जानने और समझने की कोशिश करेंगे कि 2024 के चुनावों में इन हलकों में पार्टी की हार के पीछे सबसे बड़े क्या-क्या कारण रहे।
चेहरे की भी होगी पहचान !
विधायकों को हलकों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी के साथ एक बड़ा राजनीतिक टॉस्क भी दिया है। 2024 में हारी गई 42 सीटों में से कुछ हलके ऐसे भी हैं, जहां बरसों से कमल नहीं खिल पा रहा है। ऐसे हलकों के प्रभारी मंत्रियों-विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्राउंड पर काम करें और यह पता करें कि किस तरीके से इन सीटों पर जीत हासिल की जा सकती है। इसी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को की जाएगी। इतना ही नहीं, ग्राउंड पर वर्किंग के दौरान मंत्री-विधायक यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि ऐसा कौन सा चेहरा है, जो भाजपा टिकट पर विपक्ष को पटकनी दे सकता है।

सत्ता के साथ संगठन की भी होगी जिम्मेदारी
विपक्ष के हलकों में नियुक्त किए गए मंत्रियों व विधायकों की पसंद-नापसंद का भी अब सरकार ख्याल रखेगी। इन हलकों में विकास कार्यों के साथ-साथ अधिकारियों की पोस्टिंग में भी संबंधित विधायकों से फीडबैक लिया जाएगा। पार्टी पदाधिकारियों व वर्करों को लेकर भी रिपोर्ट ली जाएगी। सरकार व पार्टी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि संबंधित हलके में किस पदाधिकारी को आगे बढ़ाए जाने से आने वाले वक्त में राजनीतिक तौर पर फायदा मिल सकता है। हलकों में होने वाले सभी प्रकार के विकास कार्य अब प्रभारी मंत्रियों-अधिकारियों की देखरेख में होंगे। ये विधायक संबंधित हलकों में संगठन का काम भी देखेंगे।
विधानसभा में पार्टियों का मौजूदा आंकड़ा
हरियाणा विधानसभा के लिए 2024 में चुनावों में 39.9% वोट शेयर के साथ भाजपा 90 में से 48 सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में आई, जो अब तक की उसकी सबसे अधिक संख्या थी। कांग्रेस ने 39.1% वोट शेयर के साथ 37 सीटें जीतीं। इसी प्रकार से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने दो और तीन सीट निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती।
सत्ता विरोधी लहर के बावजूद लगाई हैट्रिक
हरियाणा में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में भाजपा सरकार चल रही है। जब उनको राज्य की कमान सौंपी गई थी तो उस दौरान सत्ता विरोधी लहर चलनी शुरू हो गई थी। कुछ महीने बाद हुए राज्य विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने चेहरे और प्रधानमंत्री के चेहरे को पर जनता को फिर से विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि बीजेपी की सरकार में ही राज्य का विकास हो सकता है। इसके साथ ही बीजेपी ने सत्ता विरोधी लहर होने के बाद भी राज्य में जीत की हैट्रिक लगी। ऐसे में सत्ता बरकरार रखने के लिए सत्ता विरोधी लहर को मात देने के एक साल बाद, बीजेपी पहले से ही राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी के चलते भाजपा ने अपने प्रत्येक विधायक को 2024 के विधानसभा चुनावों में पार्टी द्वारा हारी गई 42 विधानसभा क्षेत्रों में से एक के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है।
इन्हें मिली जिम्मेदारी
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा को नारायणगढ़ हलके की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा को गढ़ी सांपला किलोई, मंत्री रणबीर गंगवा को फतेहाबाद की जिम्मेदारी दी गई है। गढ़ी सांपला किलोई कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हलका है। अभी तक भाजपा इस किले को भेद नहीं पाई है। वहीं, अन्य हलकों में स्थानी लोगों की राय और आने वाले वक्त के लिए फीडबैक लेने के साथ ही विधायकों, पूर्व विधायकों, मंत्री, संगठन पदाधिकारियों की डयूटी भी लगा दी गई है ताकि जवाबदेही बनी रहे। वैसे, हर हलके में विधायकों, उम्मीदवारों और दिग्गज नेताओं को जिम्मा सौंपा है। मंत्री विपुल गोयल को रोहतक प्रभारी, जबकि हांसी विधायक विनोद भयाना को फतेहाबाद, कालका की विधायक शक्तिरानी शर्मा को साढ़ौरा विस की कमान सौंपी गई है।

सीएम और विज को नहीं दी जिम्मेदारी
भाजपा की ओर से प्रदेश की 42 विधानसभा सीटों में मंत्री और विधायकों की जिम्मेदारी तय की गई है, लेकिन इससे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व दबंग मंत्री अनिल विज समेत कुछ नेताओं को अलग रखा गया है। इनमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण, ऊर्जा मंत्री अनिल विज, विधायक दादा गौतम व सतपाल जांबा के नाम शामिल हैं।



