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हरियाणा में नौकरी से हटेंगे 5 साल से कम सेवा वाले कच्चे कमर्चारी ! CM सैनी ने दी मंजूरी !

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार के एक ऑर्डर ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के माध्यम से भर्ती किए गए अनुबंधित कर्मचारियों को टेंशन में डाल दिया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक लेटर के अनुसार सरकारी विभागों में हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) के जरिए भर्ती किए गए पांच साल से कम सेवा वाले कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त किया जाए।

लेटर में यह भी कहा गया है कि ऐसा करने से खाली होने वाले स्वीकृत पदों के बारे में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) को सूचना दी जाए, जिससे उन पदों पर नियमित भर्ती की जा सके। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि ऐसा करने से कहीं पर ड्राइवर के पदों को लेकर कोई दिक्कत आती है तो स्थानीय स्तर पर 6 महीने के अनुबंध पर ड्राइवर को रखा जा सकता है।

50 हजार से अधिक कर्मियों पर लटकी तलवार !

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इसे लेकर भेजे गए प्रस्ताव को मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिल गई है। इसे लेकर अब कभी भी सरकारी आदेश जारी हो सकते हैं। हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) में कम साल से कम समय की नौकरी वाले कर्मचारियों की संख्या 50 हजार के करीब है। ऐसे में इतनी भारी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाले जाने पर पूरे प्रदेश में अलग हालात हो सकते हैं।

कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल

सरकार के इस आदेश के बाद कांग्रेस ने भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। नारनौंद से कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवार ने इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। जस्सी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लेटर को पोस्ट करते हुए लिखा कि हरियाणा सरकार द्वारा 5 साल से कम सेवा वाले कच्चे कर्मचारियों को हटाने के जो आदेश जारी किए गए हैं, वो न सिर्फ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हैं, बल्कि प्रदेश के मेहनतकश युवाओं के भविष्य पर सीधा प्रहार भी हैं।

HKRN के तहत कार्यरत 50,000 से अधिक युवाओं ने उम्मीद, मेहनत और ईमानदारी के साथ पिछले कई वर्षों से विभिन्न विभागों में सेवाएं दी हैं। इन युवाओं ने अपने परिवार, भविष्य और समाज के भरोसे के साथ यह सोचकर कार्य किया कि सरकार उनकी मेहनत को मान देगी, स्थायित्व देगी, लेकिन अब उन सभी को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

जब एक ओर सरकार रोजगार देने की बात करती है, तब दूसरी ओर इतने बड़े पैमाने पर युवाओं को बेरोजगार कर देना न सिर्फ नीतिगत असफलता है, बल्कि यह सरकार की असंवेदनशील सोच और खोखले वादों का प्रमाण भी है।

प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि “परिवर्तन” और “न्याय” के नाम पर उसे सिर्फ धोखा मिला है। अगर यही सुशासन है, तो अब सच में — बस यही बाकी था!

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